Seed Technology क्या है? | बीज प्रौद्योगिकी की A to Z जानकारी

Seed Technology क्या है— एक छोटा बीज, एक बड़ी क्रांति,सोचिए – एक छोटा सा बीज जमीन में जाता है और कुछ हफ्तों बाद वो लहलहाती फसल बन जाता है जो लाखों लोगों का पेट भरती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि आज जो बीज किसान अपने खेत में डालता है, वो पहले से कहीं ज्यादा उन्नत, रोगरोधी और उत्पादक क्यों है?

इसका जवाब है — Seed Technology यानी बीज तकनीक।जब से इंसान ने खेती करना शुरू किया, तब से बीज उसका सबसे जरूरी साथी रहा है। लेकिन आधुनिक विज्ञान ने इस साथी को और भी काबिल बना दिया है। Seed Technology एक ऐसा विज्ञान है जो बीज की गुणवत्ता, उत्पादन, संरक्षण और वितरण को बेहतर बनाने का काम करता है।

अगर आप कृषि विज्ञान, UPSC, State PSC, IBPS Agricultural Officer, या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं — तो यह टॉपिक आपके लिए बेहद जरूरी है। तो चलिए, एक-एक बात को आसान भाषा में समझते हैं।

 Seed Technology क्या है?

Seed Technology को हिंदी में बीज प्रौद्योगिकी कहते हैं। यह कृषि विज्ञान की वह शाखा है जो बीजों की गुणवत्ता सुधारने, उन्हें संरक्षित करने, परखने और किसानों तक पहुंचाने से जुड़ी है।

सरल शब्दों में कहें तो —

  • – यह विज्ञान बताता है कि अच्छा बीज कैसे बनाया जाए।
  • – बीज को कैसे स्टोर किया जाए ताकि वो खराब न हो।
  • – बीज की जांच कैसे की जाए ताकि किसान को धोखा न मिले।
  • – उन्नत बीज किसानों तक कैसे पहुंचाया जाए।

इसमें जेनेटिक्स, प्लांट ब्रीडिंग, बायोटेक्नोलॉजी, फिजियोलॉजी और एग्रोनॉमी जैसे कई विषय मिलकर काम करते हैं।

 Seed Technology का इतिहास

बीज तकनीक का इतिहास उतना ही पुराना है जितनी खेती। आइए इसे चरणबद्ध तरीके से समझते हैं —

प्राचीन काल (Ancient Period)

  • – इंसान ने लगभग 10,000 साल पहले जंगली पौधों से बीज चुनना शुरू किया।
  • – किसान अच्छे पौधों के बीज बचाकर अगले साल बोते थे — यही पहली “बीज चयन” तकनीक थी।
  • – भारत में सिंधु घाटी सभ्यता में गेहूं, जौ और कपास की खेती के प्रमाण मिलते हैं।

मध्यकाल (Medieval Period)

– 18वीं-19वीं सदी में यूरोप में Plant Breeding की शुरुआत हुई।

– Gregor Mendel (1866) ने आनुवंशिकता के नियम खोजे जो आधुनिक बीज विज्ञान की नींव बने।

आधुनिक काल (Modern Period)

  • – 20वीं सदी में Hybrid Seeds (संकर बीज) का विकास हुआ।
  • – भारत में हरित क्रांति (Green Revolution, 1960-70) के दौरान उन्नत बीज तकनीक ने देश को खाद्य संकट से बाहर निकाला।
  • – डॉ. नॉर्मन बोरलॉग और डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व योगदान दिया।
  • – 1990 के दशक में GMO (Genetically Modified Organisms) बीजों का युग शुरू हुआ।
  • – भारत में 2002 में Bt Cotton को पहले GM फसल के रूप में मंजूरी मिली।

Seed Technology का महत्व

बीज तकनीक सिर्फ किसान के लिए नहीं, पूरे देश के लिए जरूरी है। इसके महत्व को समझिए —

खाद्य सुरक्षा के लिए

  • – उन्नत बीजों से प्रति हेक्टेयर उत्पादन कई गुना बढ़ जाता है।
  • – देश की बढ़ती आबादी को भोजन उपलब्ध कराना संभव होता है।
  • – भारत जैसा देश खाद्यान्न में आत्मनिर्भर बन पाया है तो उसका बड़ा श्रेय बीज तकनीक को जाता है।

किसान की आय के लिए

  • – कम लागत में ज्यादा उत्पादन — किसान की आमदनी बढ़ती है।
  • – रोगरोधी बीजों से फसल की बर्बादी कम होती है।
  • – किसान को बार-बार कीटनाशक नहीं डालने पड़ते।

पर्यावरण के लिए

  • – सूखा सहन करने वाले बीज पानी की बचत करते हैं।
  • – कम रासायनिक खाद की जरूरत पड़ती है।
  • – मिट्टी की सेहत बनी रहती है।

राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के लिए

  • – कृषि निर्यात बढ़ता है।
  • – रोजगार के अवसर बनते हैं।
  • – बीज उद्योग एक बड़ा व्यापार बन चुका है।

बीज क्या है? (What is a Seed?)

अगर Seed Technology को समझना है, तो पहले यह जानना जरूरी है कि बीज आखिर है क्या।

बीज एक परिपक्व बीजांड (Ovule) होता है जो निषेचन (Fertilization) के बाद विकसित होता है। सरल शब्दों में कहें तो —

  • – बीज एक पौधे का वह हिस्सा है जिसमें एक नए पौधे को जन्म देने की पूरी क्षमता होती है।
  • – यह पौधे की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने का सबसे प्राकृतिक तरीका है।
  • – बीज के अंदर एक भ्रूण (Embryo) होता है जो सही परिस्थिति मिलने पर अंकुरित होकर नया पौधा बनता है।

वानस्पतिक रूप से बीज को इस तरह परिभाषित किया जाता है —

बीज एक परिपक्व बीजांड है जिसमें भ्रूण, संचित भोजन और सुरक्षात्मक आवरण होता है।”

बीज की संरचना (Structure of a Seed)

हर बीज के तीन मुख्य भाग होते हैं —

1. बीज आवरण (Seed Coat / Testa)

  • – यह बीज की बाहरी सुरक्षात्मक परत होती है।
  • – बाहरी परत को Testa और भीतरी पतली परत को Tegmen कहते हैं।
  • – यह भ्रूण को ठंड, गर्मी, नमी और कीटों से बचाता है।
  • – इस पर एक छोटा सा छेद होता है जिसे Micropyle कहते हैं — यहीं से पानी प्रवेश करता है और अंकुरण शुरू होता है।

2. भ्रूण (Embryo)

  • – यह बीज का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
  • – इसमें भविष्य के पौधे की पूरी रूपरेखा छिपी होती है।
  • – भ्रूण के मुख्य भाग —
  •   – Plumule (प्रांकुर): यह भविष्य का तना और पत्तियां बनाता है।
  •   – Radicle (मूलांकुर): यह भविष्य की जड़ बनाता है।
  •   – Hypocotyl:** Radicle और Cotyledon के बीच का हिस्सा।
  •   – Cotyledon (बीजपत्र):बीज का भोजन संग्रह करने वाला हिस्सा।

3. भ्रूणपोष (Endosperm)

– यह बीज के अंदर संचित भोजन का भंडार है।

– अंकुरण के दौरान भ्रूण को ऊर्जा और पोषण यहीं से मिलता है।

– Monocot बीजों जैसे गेहूं और चावल में Endosperm बहुत विकसित होता है।

– Dicot बीजों जैसे मटर और चना में भोजन Cotyledon में संग्रहित होता है।

 बीज के प्रमुख भाग और उनके कार्य (Parts of Seed and Their Functions)

| भाग | कार्य |

| Seed Coat (Testa) | बाहरी सुरक्षा |

| Micropyle | पानी का प्रवेश द्वार |

| Hilum | बीज का वह निशान जहां वह फली से जुड़ा था |

| Embryo | नए पौधे की उत्पत्ति |

| Plumule | भविष्य का प्ररोह (Shoot) |

| Radicle | भविष्य की जड़ |

| Cotyledon | भोजन का भंडार |

| Endosperm | अंकुरण में पोषण देना |

 बीज के प्रकार — वानस्पतिक आधार पर (Types of Seeds — Botanical Classification)

1. एकबीजपत्री बीज (Monocot Seeds)

– इनमें केवल एक Cotyledon होता है।

– उदाहरण: गेहूं, चावल, मक्का, जौ, बाजरा।

– Endosperm बड़ा और विकसित होता है।

– जड़ें रेशेदार (Fibrous) होती हैं।

2. द्विबीजपत्री बीज (Dicot Seeds)

– इनमें दो Cotyledon होते हैं।

– उदाहरण: चना, मटर, सोयाबीन, मूंगफली, सरसों।

– भोजन Cotyledon में संग्रहित होता है।

– जड़ें मूसली (Tap Root) होती हैं।

 बीज अंकुरण (Seed Germination)

बीज का जमीन में जाकर नए पौधे में बदलना — यही अंकुरण है। लेकिन यह प्रक्रिया इतनी आसान नहीं है।

अंकुरण की शर्तें (Conditions for Germination)

  • – पानी (Water): Micropyle से पानी अंदर जाता है और भ्रूण सक्रिय होता है।
  • – ऑक्सीजन (Oxygen): श्वसन के लिए जरूरी।
  • – उचित तापमान (Temperature): अधिकांश फसलों के लिए 20-30°C सबसे उपयुक्त।
  • – प्रकाश (Light): कुछ बीजों को अंकुरण के लिए प्रकाश चाहिए, कुछ को अंधेरा।

अंकुरण के चरण (Stages of Germination)

  • – पहला चरण — Imbibition: बीज पानी सोखता है और फूल जाता है।
  • – दूसरा चरण — Activation: एंजाइम सक्रिय होते हैं और संग्रहित भोजन टूटकर ऊर्जा देता है।
  • – तीसरा चरण — Cell Division: भ्रूण की कोशिकाएं विभाजित होने लगती हैं।
  • – चौथा चरण — Emergence: Radicle पहले बाहर आती है, फिर Plumule।

अंकुरण के प्रकार (Types of Germination)

  • – Epigeal Germination: Cotyledon जमीन के ऊपर आ जाते हैं। उदाहरण: सेम, कद्दू।
  • – Hypogeal Germination: Cotyledon जमीन के अंदर ही रहते हैं। उदाहरण: मटर, मक्का, गेहूं।

एक अच्छे बीज की विशेषताएं (Characteristics of a Good Quality Seed)

किसान के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि अच्छा बीज कैसे पहचानें —

  • – उच्च अंकुरण क्षमता (High Germination Percentage):  कम से कम 85-90% बीज अंकुरित होने चाहिए।
  • – आनुवंशिक शुद्धता (Genetic Purity):बीज उसी किस्म का होना चाहिए जो लेबल पर लिखा हो।
  • – भौतिक शुद्धता (Physical Purity):बीज में मिट्टी, कंकड़, खरपतवार के बीज या अन्य फसल के बीज नहीं होने चाहिए।
  • – उचित नमी (Moisture Content): बीज में नमी 8-12% के बीच होनी चाहिए — ज्यादा नमी बीज को सड़ा देती है।
  • – स्वस्थ और रोगमुक्त (Disease Free):बीज किसी फफूंद, बैक्टीरिया या वायरस से प्रभावित नहीं होना चाहिए।
  • -उच्च जीवन शक्ति (High Vigour):बीज में इतनी ताकत हो कि प्रतिकूल परिस्थिति में भी अंकुरित हो सके।
  • – सही आकार और वजन (Proper Size and Weight): एकसमान और भारे बीज बेहतर होते हैं।

बीज सुप्तावस्था (Seed Dormancy)

यह एक बहुत महत्वपूर्ण अवधारणा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं में अक्सर पूछी जाती है।

Seed Dormancy वह अवस्था है जब बीज अनुकूल परिस्थितियों के बावजूद अंकुरित नहीं होता।

Dormancy के कारण

  • – कठोर बीज आवरण जो पानी या गैस को प्रवेश नहीं करने देता।
  • – भ्रूण की अपरिपक्वता।
  • – ABA (Abscisic Acid) जैसे वृद्धि अवरोधक हार्मोन की उपस्थिति।
  • – प्रकाश या तापमान की विशेष जरूरत।

Dormancy तोड़ने के तरीके

  • – Scarification: बीज आवरण को खुरच कर या रसायन से कमजोर करना।
  • – Stratification: बीज को कम तापमान पर रखना।
  • – Light Treatment: विशेष प्रकाश देना।
  • – Chemical Treatment: Gibberellin या KNO3 का उपयोग।

बीज की जीवन क्षमता (Seed Viability and Longevity)

  • – Seed Viability: बीज की जीवित रहने और अंकुरित होने की क्षमता।
  • – Seed Longevity: बीज कितने समय तक जीवित और उपयोगी रह सकता है।

विभिन्न फसलों की Seed Longevity

  • – प्याज और मूंगफली: 1-2 साल
  • – गेहूं और चावल: 3-5 साल
  • – टमाटर और बैंगन: 4-5 साल
  • – सोयाबीन: 2-3 साल
  • – कमल: सैकड़ों साल तक (अपवाद)

Viability बढ़ाने के उपाय

  • – कम तापमान और कम नमी पर भंडारण।
  • – Hermetic (वायुरोधी) पैकेजिंग।
  • – Silica Gel का उपयोग नमी सोखने के लिए।

बीज के प्रकार (Types of Seeds)

बीज तकनीक में बीजों को कई आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है —

1. उत्पत्ति के आधार पर

  • – Open Pollinated Varieties (OPV) — खुले परागण वाली किस्में:** इनके बीज किसान खुद बचा सकते हैं और अगले साल बो सकते हैं।
  • – Hybrid Seeds — संकर बीज: दो अलग-अलग पौधों को मिलाकर बनाए जाते हैं। पहली पीढ़ी में उत्पादन बहुत ज्यादा होता है।
  • – GMO Seeds — आनुवंशिक रूप से संशोधित बीज:  जीनों में बदलाव करके विशेष गुण डाले जाते हैं जैसे कीट प्रतिरोधकता।

2. प्रमाणन वर्ग के आधार पर (Seed Certification Classes)

  • – Breeder Seed (प्रजनक बीज): पौधा प्रजनक द्वारा तैयार, सबसे शुद्ध। इसे Golden Yellow Tag लगता है।
  • – Foundation Seed (आधार बीज): Breeder Seed से तैयार, White Tag लगता है।
  • – Certified Seed (प्रमाणित बीज): Foundation Seed से तैयार, किसानों को बेचा जाता है। Blue Tag लगता है।
  • – Truthful Labelled Seed (TL Seed):  बिना सरकारी प्रमाणन के, लेकिन कंपनी की जिम्मेदारी पर।

3. विशेषता के आधार पर

  • – Drought Resistant Seeds: कम पानी में उगने वाले बीज।
  • – Disease Resistant Seeds:

 बीमारियों से लड़ने में सक्षम।

  • – High Yielding Varieties (HYV): अधिक उत्पादन देने वाले।
  • – Early Maturing Seeds: जल्दी पकने वाले।

 Seed Technology की प्रमुख तकनीकें (Key Techniques)

यहां वो तकनीकें हैं जो आधुनिक बीज विज्ञान को खास बनाती हैं —

1. Plant Breeding (पौध प्रजनन)

– पौधों के गुणों को बेहतर बनाने की प्रक्रिया।

– Selection, Hybridization, Mutation Breeding जैसी विधियां शामिल हैं।

2. Seed Processing (बीज प्रसंस्करण)

  • – बीज की सफाई, ग्रेडिंग, उपचार और पैकेजिंग।
  • – Seed Coating और Seed Priming इसके उदाहरण हैं।
  • – Seed Priming में बीज को नियंत्रित तरीके से पानी देकर उसे अंकुरण के लिए तैयार किया जाता है।

3. Seed Testing (बीज परीक्षण)

  • – Germination Test — कितने प्रतिशत बीज उगेंगे।
  • – Purity Test — बीज में कितनी मिलावट है।
  • – Moisture Content — बीज में नमी का स्तर।
  • – Vigour Test — बीज की ताकत और जीवन शक्ति।

4. Seed Storage (बीज भंडारण)

  • – Cold Storage, Seed Vaults, Hermetic Storage जैसी विधियां।
  • – सही तापमान और नमी पर बीज सालों-साल जीवित रह सकते हैं।
  • – Svalbard Global Seed Vault (नॉर्वे) दुनिया का सबसे बड़ा बीज भंडार है।

5. Biotechnology in Seeds

  • – CRISPR-Cas9 जैसी जीन एडिटिंग तकनीकें।
  • – Tissue Culture द्वारा रोगमुक्त पौधे तैयार करना।
  • – Marker Assisted Selection (MAS) — जीन की पहचान कर तेजी से उन्नत किस्में बनाना।

🔍 बीज परीक्षण (Seed Testing) — क्या जाँचा जाता है?

परीक्षण का नामक्या मापा जाता हैमानक (Standard)
Germination Testकितने % बीज अंकुरित होते हैंगेहूँ: ≥85%, धान: ≥80%
Purity Testबीज में मिलावट का स्तर≥98% शुद्धता आवश्यक
Moisture Testनमी की मात्रा≤12% (अनाज के लिए)
Vigour Testबीज की जीवनशक्ति (Vigour)Tetrazolium Test से मापा जाता है
Health Testबीज जनित रोग (Seed-borne diseases)रोगाणु-मुक्त होना चाहिए

Seed Technology के कार्य (Functions)

बीज तकनीक के मुख्य कार्य इस प्रकार हैं —

  • – नई और उन्नत किस्मों का विकास करना।
  • – बीज की गुणवत्ता को प्रमाणित और सुनिश्चित करना।
  • – बीज को लंबे समय तक सुरक्षित रखना।
  • – किसानों तक समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज पहुंचाना।
  • – बीज उद्योग को नियंत्रित और व्यवस्थित रखना।
  • – जलवायु परिवर्तन के अनुकूल फसलें विकसित करना।

भारत में Seed Technology — महत्वपूर्ण संस्थाएं

  • – ICAR (Indian Council of Agricultural Research): भारत की सबसे बड़ी कृषि अनुसंधान संस्था।
  • – NBPGR (National Bureau of Plant Genetic Resources): पौध आनुवंशिक संसाधनों का राष्ट्रीय ब्यूरो, नई दिल्ली।
  • – NSC (National Seeds Corporation):  राष्ट्रीय बीज निगम।
  • – SFCI (State Farms Corporation of India):  राज्य कृषि फार्म निगम।
  • – Central Seed Committee: Seeds Act 1966 के तहत गठित।
  • – Seeds Act 1966 और Seeds (Control) Order 1983: बीज के उत्पादन, बिक्री और गुणवत्ता को नियंत्रित करने वाले कानून।

महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)

  • – भारत दुनिया के पांच सबसे बड़े बीज उत्पादक देशों में शामिल है।
  • – हरित क्रांति में उपयोग की गई गेहूं की किस्म “Sonora-64” और “Lerma Rojo” मैक्सिको से आई थी।
  • – Bt Cotton भारत की पहली और एकमात्र अनुमोदित GM फसल है।
  • – Svalbard Global Seed Vault में 13 लाख से ज्यादा बीज नमूने सुरक्षित हैं।
  • – Seeds Act 1966 भारत में बीजों की गुणवत्ता को कानूनी रूप से नियंत्रित करता है।
  • – ISTA (International Seed Testing Association) बीज परीक्षण के अंतरराष्ट्रीय नियम बनाती है।
  • – Seed Certification में Blue Tag प्रमाणित बीज को और White Tag आधार बीज को दर्शाता है।
  • – भारत में बीज प्रतिस्थापन दर (Seed Replacement Rate – SRR) अभी भी विकसित देशों की तुलना में कम है।
  • – NBPGR के पास 4 लाख से ज्यादा पौध आनुवंशिक संसाधन संग्रहित हैं।

निष्कर्ष (Conclusion)

Seed Technology सिर्फ बीज की कहानी नहीं है — यह पूरी कृषि व्यवस्था की रीढ़ है। एक अच्छा बीज ही एक अच्छी फसल की गारंटी देता है और एक अच्छी फसल ही देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

जलवायु परिवर्तन, बढ़ती जनसंख्या और घटती कृषि भूमि के इस दौर में Seed Technology का महत्व और भी बढ़ गया है। आज CRISPR जैसी तकनीकें बीजों को उस स्तर पर ले जा रही हैं जहां कभी सोचा भी नहीं गया था।

अगर भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनना है, तो कृषि क्षेत्र में बीज तकनीक को सबसे पहले मजबूत करना होगा। और इसकी शुरुआत होती है — एक जागरूक किसान, एक गुणवत्तापूर्ण बीज और एक मजबूत बीज नीति से।

Final Thought: याद रखिए — हर बड़े बदलाव की शुरुआत एक छोटे बीज से होती है।

सम्बंधित प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Seed Technology क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?

Seed Technology (बीज प्रौद्योगिकी) कृषि विज्ञान की वह शाखा है जो बीज की गुणवत्ता सुधारने, उत्पादन बढ़ाने, भंडारण करने और किसानों तक पहुंचाने से जुड़ी है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को उन्नत, शुद्ध और अधिक उत्पादक बीज उपलब्ध कराना है।

प्रश्न 2: Certified Seed, Foundation Seed और Breeder Seed में क्या अंतर है?

Breeder Seed सबसे शुद्ध होता है जिसे वैज्ञानिक तैयार करते हैं। Foundation Seed, Breeder Seed से बनता है और Certified Seed, Foundation Seed से। Breeder Seed पर Golden Yellow Tag, Foundation Seed पर White Tag और Certified Seed पर Blue Tag लगाया जाता है।

प्रश्न 3: Hybrid Seeds और Open Pollinated Varieties में क्या फर्क है?

Hybrid Seeds दो अलग पौधों को क्रॉस करके बनाए जाते हैं और पहली पीढ़ी में अधिक उत्पादन देते हैं, लेकिन इनके बीज अगले साल बोने योग्य नहीं होते। OPV बीजों को किसान खुद बचाकर अगले साल उपयोग कर सकते हैं।

प्रश्न 4: भारत में Seeds Act 1966 क्या है?

Seeds Act 1966 भारत सरकार का वह कानून है जो बीज के उत्पादन, बिक्री, आयात-निर्यात और गुणवत्ता को नियंत्रित करता है। इसके तहत Central Seed Committee का गठन किया गया। यह किसानों को घटिया बीज बेचने से रोकता है।

प्रश्न 5: GMO बीज क्या होते हैं और भारत में इन्हें किस फसल में मंजूरी मिली है?

GMO (Genetically Modified Organism) बीजों में वैज्ञानिक तरीके से जीन में बदलाव करके विशेष गुण डाले जाते हैं जैसे कीट प्रतिरोधकता या सूखा सहनशीलता। भारत में 2002 में Bt Cotton एकमात्र GM फसल के रूप में मंजूर की गई।

प्रश्न 6: Seed Priming क्या है और इससे किसान को क्या फायदा होता है?

Seed Priming एक ऐसी तकनीक है जिसमें बीज को बोने से पहले नियंत्रित तरीके से पानी या रासायनिक घोल में भिगोया जाता है। इससे बीज का अंकुरण जल्दी और एकसमान होता है, पौध मजबूत होती है और फसल की शुरुआत बेहतर होती है।

प्रश्न 7: NBPGR क्या है और इसका क्या काम है?

NBPGR यानी National Bureau of Plant Genetic Resources नई दिल्ली में स्थित ICAR की संस्था है। यह भारत के पौध आनुवंशिक संसाधनों को एकत्र करने, संरक्षित करने और उनका मूल्यांकन करने का काम करती है। इसके पास 4 लाख से अधिक जर्मप्लाज्म नमूने सुरक्षित हैं।

प्रश्न 8: हरित क्रांति में Seed Technology की क्या भूमिका थी?

हरित क्रांति (1960-70) में HYV यानी High Yielding Varieties के बीज, जैसे गेहूं की Sonora-64 किस्म, ने भारत में उत्पादन को कई गुना बढ़ा दिया। डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में इन बीजों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाया गया और देश खाद्य संकट से उबरा।


प्रश्न 9: Seed Replacement Rate (SRR) क्या है?

Seed Replacement Rate वह दर है जो बताती है कि किसानों ने कितने प्रतिशत क्षेत्र में अपने पुराने घर के बीजों की जगह प्रमाणित या उन्नत बीज उपयोग किए। भारत में यह दर अभी भी कम है और इसे बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।

प्रश्न 10: Svalbard Global Seed Vault क्या है और यह क्यों जरूरी है?

Svalbard Global Seed Vault नॉर्वे के आर्कटिक क्षेत्र में स्थित दुनिया का सबसे बड़ा बीज भंडार है। इसमें 13 लाख से अधिक बीज नमूने सुरक्षित रखे गए हैं। प्राकृतिक आपदा, युद्ध या जलवायु परिवर्तन की स्थिति में यह मानवता की खाद्य विविधता को बचाने का काम करेगा।

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ABHISHEK SHORI
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