IPM-Integrated Pest Management क्या है | समेकित कीट प्रबंधन | घटक, कार्य और विशेषताएँ

Integrated Pest Management क्या है-कल्पना कीजिए — एक किसान ने पूरे साल मेहनत करके फसल उगाई, और फसल तैयार होने से पहले ही कीड़े-मकोड़ों ने उसे बर्बाद कर दिया। यह समस्या सिर्फ एक किसान की नहीं, बल्कि पूरे देश की खाद्य सुरक्षा से जुड़ी है।

अब सवाल यह है कि क्या सिर्फ कीटनाशक (Pesticide) छिड़कना ही एकमात्र रास्ता है? जवाब है — नहीं। इसका सबसे समझदार और टिकाऊ समाधान है “समेकित कीट प्रबंधन” यानी Integrated Pest Management (IPM)।

Integrated Pest Management क्या है

IPM एक ऐसी रणनीति है जो कीटों को पूरी तरह खत्म करने की बजाय उन्हें “आर्थिक नुकसान की सीमा” से नीचे रखती है — और यह काम करती है प्रकृति के साथ मिलकर, न कि उसके विरुद्ध।

परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्व

यह टॉपिक निम्नलिखित प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:

– UPSC (प्रारंभिक एवं मुख्य परीक्षा — कृषि, पर्यावरण एवं सामान्य विज्ञान)

– State PSC (कृषि अधिकारी, ग्राम विकास अधिकारी परीक्षाएँ)

– SSC CGL, CHSL

– Railway NTPC, Group D

– Banking — IBPS PO, Clerk (सामान्य जागरूकता)

UPSC और State PSC में कृषि नीति, टिकाऊ खेती और पर्यावरण संरक्षण के अंतर्गत IPM से सीधे प्रश्न पूछे जाते हैं। भारत सरकार की कृषि नीतियों में IPM को प्राथमिकता दी जाती है, इसलिए यह टॉपिक और भी प्रासंगिक हो जाता है।

 IPM की परिभाषा (Definition of IPM)

समेकित कीट प्रबंधन (IPM) एक पर्यावरण-अनुकूल, आर्थिक रूप से व्यवहारिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर आधारित कीट नियंत्रण की व्यापक रणनीति है।

  • – इसमें जैविक, भौतिक, यांत्रिक और रासायनिक विधियों का संतुलित उपयोग किया जाता है।
  • – लक्ष्य कीटों को पूरी तरह नष्ट करना नहीं, बल्कि उन्हें “आर्थिक क्षति स्तर” (Economic Threshold Level — ETL) से नीचे रखना है।
  • – IPM रासायनिक कीटनाशकों के अंधाधुंध उपयोग को कम करता है।
  • – इसे “FAO” (खाद्य एवं कृषि संगठन) द्वारा वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहित किया जाता है।
  • – भारत में IPM कार्यक्रम 1992 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया।

IPM की आवश्यकता क्यों पड़ी? (Why IPM Was Needed?)

यह समझना जरूरी है कि IPM आया क्यों — क्योंकि परीक्षा में इसकी पृष्ठभूमि भी पूछी जाती है:

  • – अत्यधिक कीटनाशकों के उपयोग से मिट्टी, पानी और वायु प्रदूषित हो रही थी।
  • – कीटों में “कीटनाशक प्रतिरोधक क्षमता” (Pesticide Resistance) विकसित होने लगी।
  • – लाभकारी कीटों (जैसे मधुमक्खी) और प्राकृतिक शत्रुओं का भी नाश होने लगा।
  • – खाद्य पदार्थों में कीटनाशकों के अवशेष (Residues) स्वास्थ्य के लिए खतरा बन गए।
  • – किसानों की लागत बढ़ रही थी और लाभ घट रहा था।

इन सभी समस्याओं के समाधान के रूप में IPM का विकास हुआ।

 IPM के मुख्य घटक (Components of IPM)

IPM की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह अकेले किसी एक विधि पर निर्भर नहीं रहता। इसके कई घटक मिलकर काम करते हैं:

जैविक नियंत्रण (Biological Control)

  • – कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं (परजीवी, परभक्षी, रोगाणु) का उपयोग।
  • – उदाहरण — “ट्राइकोग्रामा” (Trichogramma) परजीवी ततैया का उपयोग तना छेदक (Stem Borer) के नियंत्रण में।
  • – “क्राइसोपर्ला” (Chrysoperla) नामक कीट माहू (Aphid) को खाता है।
  • – “बेसिलस थुरिनजिएंसिस” (Bacillus thuringiensis — Bt) एक जीवाणु है जो कई कीटों के लिए घातक है।
  • – यह सबसे पर्यावरण-अनुकूल विधि है।

सांस्कृतिक नियंत्रण (Cultural Control)

  • – फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाना — एक ही फसल बार-बार न लगाना।
  • – उचित समय पर बुवाई और कटाई।
  • – रोग-प्रतिरोधी किस्मों (Resistant Varieties) का चयन।
  • – खेत की गहरी जुताई जिससे मिट्टी में छुपे कीट नष्ट हों।
  • – साफ-सफाई — फसल अवशेषों को नष्ट करना।

यांत्रिक और भौतिक नियंत्रण (Mechanical and Physical Control)

  • – “फेरोमोन ट्रैप” (Pheromone Trap) — नर कीटों को आकर्षित करके पकड़ना।
  • – “येलो स्टिकी ट्रैप” (Yellow Sticky Trap) — माहू और सफेद मक्खी को पकड़ने के लिए।
  • – “लाइट ट्रैप” (Light Trap) — रात के कीटों को प्रकाश से आकर्षित करके पकड़ना।
  • – हाथ से कीटों को चुनना (Hand Picking)।
  • – जाल (Net) और अवरोध (Barrier) का उपयोग।

रासायनिक नियंत्रण (Chemical Control)

  • – IPM में रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग “अंतिम विकल्प” के रूप में किया जाता है।
  • – केवल तब उपयोग करें जब कीट की संख्या ETL को पार कर जाए।
  • – कम विषैले और जैव-अवक्रमणीय (Biodegradable) कीटनाशकों को प्राथमिकता दें।
  • – सही मात्रा, सही समय और सही विधि से छिड़काव।

नियामक नियंत्रण (Regulatory Control)

  • – सरकारी नियमों द्वारा हानिकारक कीटों के प्रवेश पर रोक।
  • – संगरोध (Quarantine) उपाय — विदेश से आने वाले बीजों और पौधों की जाँच।
  • – हानिकारक कीटनाशकों पर प्रतिबंध।
IPM के कार्य एवं उद्देश्य (Functions and Objectives of IPM)
  • – कीट जनसंख्या को आर्थिक क्षति स्तर (ETL) से नीचे रखना।
  • – पर्यावरण प्रदूषण को कम करना।
  • – कृषि उत्पादन लागत में कमी लाना।
  • – मानव स्वास्थ्य की रक्षा करना।
  • – लाभकारी जीवों और जैव विविधता को बनाए रखना।
  • – टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture) को बढ़ावा देना।
  • – किसानों की आय में वृद्धि करना।
 IPM की विशेषताएँ (Characteristics of IPM)
  • – “बहुआयामी दृष्टिकोण” — एक नहीं, कई विधियों का एक साथ उपयोग।
  • – “पर्यावरण अनुकूल” — प्रकृति को नुकसान पहुँचाए बिना कीट नियंत्रण।
  • – “आर्थिक व्यवहारिकता” — ETL के आधार पर निर्णय लेना, ताकि अनावश्यक खर्च न हो।
  • – “दीर्घकालिक समाधान” — यह अस्थायी नहीं, बल्कि स्थायी और टिकाऊ है।
  • – “वैज्ञानिक आधार” — कीट की पहचान, निगरानी और विश्लेषण पर आधारित।
  • – “लचीलापन” — स्थान, फसल और कीट के अनुसार रणनीति बदली जा सकती है।

महत्वपूर्ण अवधारणाएँ (Key Concepts — Exam Important)

ये परीक्षाओं में सीधे पूछे जाते हैं:

  • “आर्थिक क्षति स्तर” (Economic Injury Level — EIL)
  • – वह कीट घनत्व जिस पर कीट द्वारा होने वाला नुकसान नियंत्रण उपाय की लागत के बराबर हो जाता है।
  • “आर्थिक दहलीज” (Economic Threshold Level — ETL)
  • – वह कीट घनत्व जिस पर नियंत्रण उपाय शुरू करना जरूरी हो जाता है, ताकि EIL तक न पहुँचे।
  • – ETL हमेशा EIL से कम होता है।

“फेरोमोन” (Pheromone)

  • – कीटों द्वारा स्रावित रासायनिक पदार्थ जो उन्हें आकर्षित करते हैं।
  • – IPM में इसका उपयोग “फेरोमोन ट्रैप” में होता है।
  • “बायोपेस्टीसाइड” (Biopesticide)
  • – जैविक स्रोतों से बना कीटनाशक जैसे — Bt (Bacillus thuringiensis), नीम आधारित कीटनाशक।

भारत में IPM (IPM in India)

  • – भारत में IPM कार्यक्रम “कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय” के अंतर्गत चलाया जाता है।
  • – “केंद्रीय समेकित कीट प्रबंधन केंद्र” (Central IPM Centre) फरीदाबाद में स्थित है।
  • – देश में 30 से अधिक राज्य IPM केंद्र (State IPM Centres) हैं।
  • – “किसान पाठशाला” (Farmer Field School — FFS) के माध्यम से किसानों को IPM का प्रशिक्षण दिया जाता है।
  • – राष्ट्रीय कृषि नीति में IPM को प्राथमिकता दी गई है।
  • – भारत का लक्ष्य 2030 तक कीटनाशकों के उपयोग में 50% की कमी लाना है।

IPM से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)

ये तथ्य सीधे परीक्षा में पूछे जाते हैं:

  • – IPM की अवधारणा सबसे पहले 1950 के दशक में अमेरिका में विकसित हुई।
  • – FAO ने 1967 में IPM को आधिकारिक रूप से परिभाषित किया।
  • – भारत में IPM कार्यक्रम 1992 से राष्ट्रीय स्तर पर लागू है।
  • – “ट्राइकोग्रामा” सबसे अधिक उपयोग की जाने वाली परजीवी ततैया है।
  • – “नीम” (Azadirachta indica) भारत में सबसे लोकप्रिय जैव-कीटनाशक का स्रोत है।
  • – “बेसिलस थुरिनजिएंसिस” (Bt) से बने जैव-कीटनाशक कई देशों में व्यापक रूप से प्रयोग होते हैं।
  • – फेरोमोन ट्रैप विशेष रूप से “फॉल आर्मीवर्म” (Fall Armyworm) नियंत्रण में प्रभावी हैं।
  • – IPM अपनाने से कीटनाशक लागत में 25-50% तक की कमी हो सकती है।
  • – केंद्रीय IPM केंद्र, फरीदाबाद (हरियाणा) में स्थित है।
  • – “एकीकृत रोग प्रबंधन” (Integrated Disease Management — IDM) IPM का ही विस्तारित रूप है।

परीक्षा में पूछे जाने वाले मुख्य बिंदु (Exam-Important Points)

इन्हें रेखांकित करके याद रखें:

  • – IPM का पूरा नाम — Integrated Pest Management (समेकित कीट प्रबंधन)
  • – भारत में IPM शुरू हुआ — 1992
  • – केंद्रीय IPM केंद्र — फरीदाबाद, हरियाणा
  • – ETL — Economic Threshold Level (आर्थिक दहलीज)
  • – EIL — Economic Injury Level (आर्थिक क्षति स्तर)
  • – Bt — Bacillus thuringiensis (जैव-कीटनाशक)
  • – नीम — सबसे प्रमुख जैव-कीटनाशक स्रोत
  • – FAO — IPM को 1967 में परिभाषित किया
  • – ट्राइकोग्रामा — परजीवी ततैया, तना छेदक नियंत्रण में उपयोगी
  • – FFS — Farmer Field School (किसान पाठशाला)
निष्कर्ष (Conclusion)

समेकित कीट प्रबंधन (IPM) आज के समय की सबसे जरूरी कृषि रणनीतियों में से एक है। यह न केवल कीटों से फसल की रक्षा करता है, बल्कि पर्यावरण, मानव स्वास्थ्य और किसान की आर्थिक स्थिति — तीनों का एक साथ ख्याल रखता है।

IPM की सोच यह है कि “प्रकृति के साथ लड़ो मत, उससे काम लो।” यही सोच आज टिकाऊ और जैविक खेती की नींव बन रही है।

परीक्षा की दृष्टि से — IPM की परिभाषा, घटक, ETL, EIL, जैव-कीटनाशक, फेरोमोन ट्रैप, केंद्रीय IPM केंद्र और भारत में IPM की शुरुआत — ये सभी बिंदु बेहद महत्वपूर्ण हैं।

सम्बंधित प्रश्न और उत्तर (FAQs)
प्रश्न 1: IPM का पूरा नाम क्या है?

उत्तर: IPM का पूरा नाम है — Integrated Pest Management, जिसे हिंदी में “समेकित कीट प्रबंधन” कहते हैं।

प्रश्न 2: IPM का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: IPM का मुख्य उद्देश्य कीटों को पूरी तरह नष्ट करना नहीं, बल्कि उनकी संख्या को आर्थिक क्षति स्तर (EIL) से नीचे रखना है — वह भी पर्यावरण को न्यूनतम नुकसान पहुँचाते हुए।

प्रश्न 3: ETL और EIL में क्या अंतर है?

उत्तर: EIL (Economic Injury Level) वह स्तर है जहाँ कीट से नुकसान नियंत्रण लागत के बराबर हो जाता है। ETL (Economic Threshold Level) वह स्तर है जिस पर नियंत्रण उपाय शुरू करने होते हैं ताकि EIL तक न पहुँचे। ETL हमेशा EIL से कम होता है

प्रश्न 4: IPM में जैविक नियंत्रण क्या है?

उत्तर: जैविक नियंत्रण में कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं — जैसे परजीवी ततैया (ट्राइकोग्रामा), परभक्षी कीट (क्राइसोपर्ला) और जीवाणु (Bt) — का उपयोग कीटों को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है।

प्रश्न 5: भारत में केंद्रीय IPM केंद्र कहाँ स्थित है?

उत्तर: भारत में “केंद्रीय समेकित कीट प्रबंधन केंद्र” (Central IPM Centre) फरीदाबाद, हरियाणा में स्थित है।

प्रश्न 6: फेरोमोन ट्रैप क्या है?

उत्तर: फेरोमोन ट्रैप एक यांत्रिक नियंत्रण उपकरण है जिसमें कीटों द्वारा स्रावित रासायनिक पदार्थ (Pheromone) का उपयोग करके नर कीटों को आकर्षित किया जाता है और पकड़ा जाता है। इससे प्रजनन चक्र टूटता है।

प्रश्न 7: Bt (बेसिलस थुरिनजिएंसिस) क्या है?

उत्तर: Bt एक मिट्टी में पाया जाने वाला जीवाणु है जो कुछ विशेष प्रकार के कीटों के लिए विषैला होता है। इससे बने जैव-कीटनाशक IPM में व्यापक रूप से प्रयोग होते हैं। यह मनुष्यों और अन्य जीवों के लिए हानिरहित होता है।

प्रश्न 8: भारत में IPM कार्यक्रम कब शुरू हुआ?

उत्तर: भारत में IPM कार्यक्रम 1992 में राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया। इसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत लागू किया जाता है।

प्रश्न 9: IPM में रासायनिक नियंत्रण की क्या भूमिका है?

उत्तर: IPM में रासायनिक कीटनाशक अंतिम विकल्प होते हैं। इनका उपयोग केवल तब किया जाता है जब कीट की संख्या ETL को पार कर जाए और अन्य विधियाँ अपर्याप्त साबित हों।

प्रश्न 10: IPM को FAO ने कब परिभाषित किया?

उत्तर: FAO (खाद्य एवं कृषि संगठन) ने IPM को 1967 में आधिकारिक रूप से परिभाषित किया। इसके बाद यह अवधारणा पूरी दुनिया में टिकाऊ कृषि की आधारशिला बन गई।

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ABHISHEK SHORI
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